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Lemuria/hi: Difference between revisions

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<span id="The_Mother_flame_rising_again"></span>
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== मातृ लौ फिर से ऊपर उठना ==
== दिव्य मातृ लौ का फिर से ऊपर उठना ==


१९७१ में पवित्र अग्नि के भक्तों ने श्वेत महासंघ (Great White Brotherhood) के [[Special:MyLanguage/La Tourelle|ला टौरेल]] (La Tourelle) नामक बाहरी आश्रय स्थल में सेवा करते हुए मू की मातृ लौ को भौतिक सप्तक में स्थापित कर दिया था। ऐसा करके उन्होंने बीसवीं शताब्दी के अंतिम चरण में शुरू होने वाली कुम्भ -युगीन संस्कृति की आधारशिला रखी। एक बार फिर, मशाल पारित कर दी गई है; और इस बार, भगवान की कृपा और मनुष्य के प्रयास से, यह लुप्त नहीं होगी।   
१९७१ में पवित्र अग्नि के भक्तों ने श्वेत महासंघ (Great White Brotherhood) के [[Special:MyLanguage/La Tourelle|ला टौरेल]] (La Tourelle) नामक बाहरी आश्रय स्थल में सेवा करते हुए मू की दिव्य मातृ लौ को भौतिक सप्तक में स्थापित कर दिया था। ऐसा करके उन्होंने बीसवीं शताब्दी के अंतिम चरण में शुरू होने वाली कुम्भ -युगीन संस्कृति की आधारशिला रखी। एक बार फिर, मशाल पारित कर दी गई है; और इस बार, भगवान की कृपा और मनुष्य के प्रयास से यह लुप्त नहीं होगी।   


कई शताब्दियों से हम पिता के रूप में ईश्वर की पूजा करते आ रहे हैं, परन्तु अगले चक्र में ईश्वर की पूजा पिता एवं माता दोनों ही रूपों में की जायेगी। यह ही दिव्यगुरूओं के दर्शन और जीवन शैली का मूल विषय भी है। यह पदार्थ में आत्मा के सम्पूर्ण आगमन का युग है क्योंकि इस समय मनुष्य चारों तत्वों - अग्नि, वायु, जल और पृथ्वी  - पर अपना प्रभुत्व स्थापित करेगा। ये चार तत्त्व ईश्वर की उभयलिंगी चेतना (पुरुष और स्‍त्री दोनों के शारीरिक लक्षणों की चेतना) के चार स्तरों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन पर उसे ईश्वर के साथ मिलने से पहले महारत हासिल करनी चाहिए। माँ के रूप में ईश्वर की पूजा और देवी-देवताओं के स्त्रीवाची कार्यों के उत्थान से, विज्ञान और धर्म अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएंगे और मनुष्य को यह समझ आ जाएगा की उसके अस्तित्व की वेदी पर स्थापित लौ ही भगवान की आत्मा का अंश है। इसी तरह वह प्रकृति के में भी ईश्वर के तत्व की खोज करेगा। इसके साथ ही, दिव्य गूढ़ दर्शन की प्रबुद्धता के माध्यम से वह स्वयं को जीवित आत्मा - दिव्य स्त्री के बीज - के रूप स्वीकार कर लेगा।
कई शताब्दियों से हम पिता के रूप में ईश्वर की पूजा करते आ रहे हैं, परन्तु अगले युग में ईश्वर की पूजा पिता एवं माता दोनों ही रूपों में की जायेगी। यह ही दिव्यगुरूओं के दर्शन और जीवन शैली का मूल विषय भी है। यह पदार्थ में आत्मा के सम्पूर्ण आगमन का युग है क्योंकि इस समय मनुष्य चारों तत्वों - अग्नि, वायु, जल और पृथ्वी  - पर अपना प्रभुत्व स्थापित करेगा। ये चार तत्त्व ईश्वर की उभयलिंगी (androgynous) चेतना (पुरुष और स्‍त्री दोनों के शारीरिक लक्षणों की चेतना) के चार स्तरों का प्रतिनिधित्व करते हैं जिन पर उसे ईश्वर के साथ मिलने से पहले निपुणता प्राप्त करनी चाहिए। दिव्य माँ के रूप में ईश्वर की पूजा और देवी-देवताओं के स्त्रीवाची कार्यों (Feminine aspect of the Deity) के उत्थान से, विज्ञान और धर्म अपनी चरम सीमा पर पहुंच जाएंगे और मनुष्य को यह समझ लेगा कि उसके अस्तित्व की वेदी पर स्थापित त्रिज्योति लौ ही भगवान की आत्मा का अस्तित्व है। इसी तरह वह प्रकृति में भी ईश्वर के तत्व की खोज करेगा। इसके साथ ही, दिव्य गूढ़ दर्शन की प्रबुद्धता के माध्यम से वह स्वयं को जीवित आत्मा - दिव्य स्त्री के बीज - के रूप (living Christ—the seed of the Divine Woman)में स्वीकार कर लेगा।


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==पतन के अभिलेखों का रूपांतरण ==
==पतन के अभिलेखों का रूपांतरण ==


सैन डिएगो (San Diego), कैलिफ़ोर्निया (California) में दी गई एक दिव्य वाणी (dictation) में, दिव्या गुरु रा मू ने लेमूरिया के पतन के रिकॉर्ड को रिक्त करने के लिए छात्रों को आह्वान दिया है:
सैन डिएगो (San Diego), कैलिफ़ोर्निया (California) में दी गई एक दिव्य वाणी (dictation) में,दिव्य गुरु रा मू ने लेमूरिया के पतन के रिकॉर्ड को रिक्त करने के लिए छात्रों को आह्वान दिया है:


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लेमूरिया के अभिलेखों को साफ़ करने के लिए, मैं, रा म्यू, समुद्र की गहराइयों से बाहर आया हूँ। समुद्र तटों और ग्रह-व्‍यवस्‍था के संतुलन के लिए प्रशांत महासागर के नीचे रखे इन अभिलेखों को साफ़ करना अत्यावश्यक है।   
लेमूरिया के अभिलेखों को साफ़ करने के लिए, मैं, रा म्यू, समुद्र की गहराइयों से बाहर आया हूँ। समुद्र तटों और ग्रह-व्‍यवस्‍था के संतुलन के लिए प्रशांत महासागर के नीचे रखे इन अभिलेखों को साफ़ करना अत्यावश्यक है।   


हम आप सब - प्रकाश और लेमूरिया की जीवात्माओं - के यहाँ पर एकत्र होने के लिए आभारी हैं। इस समय हमारा ध्येय आपको जीवित लौ के दिल में बुलाना है; जीवित लौ पवित्र आत्मा और [[Special:MyLanguage/Saint Germain|सेंट जरमेन]] (Saint Germain) की [[Special:MyLanguage/violet flame|वायलेट लौ]] (violet flame) को कहते हैं। प्रियजनों, हम आपको [[Special:MyLanguage/decrees|दिव्य आदेश]] (decrees) देने के लिए कहते हैं ताकि वायलेट लौ ना सिर्फ समुद्र के ऊपर से बल्कि समुद्र की गहराई में बहुत अंदर तक उतर कर लेमूरिया महाद्वीप के अभिलेखों (records) को साफ कर सके।   
हम आप सब - और लेमूरिया की जीवात्माओं - के यहाँ पर एकत्र होने के लिए आभारी हैं। इस समय हमारा ध्येय आप सबसे मिलकर वायलेट लौ और [[Special:MyLanguage/Saint Germain|सेंट जरमेन]] (Saint Germain) [[Special:MyLanguage/violet flame|वायलेट लौ]] (violet flame) को कहते हैं। प्रियजनों, हम आपको [[Special:MyLanguage/decrees|दिव्य आदेश]] (decrees) देने के लिए कहते हैं ताकि वायलेट लौ ना सिर्फ समुद्र के ऊपर से बल्कि समुद्र की गहराई में बहुत अंदर तक उतर कर लेमूरिया महाद्वीप के अभिलेखों (records) को साफ (clearing) कर सके।   


आप में से कई लोग लेमूरिया के समय में मौजूद थे। आप लेमूरिया का इतिहास और भूगोल जानते हैं। आपने देवताओं का युद्ध भी देखा है।<ref>१८ अक्टूबर १९८७ को एक दिव्य वाणी (dictation) में, एलोहीम पीस (Elohim Peace) ने कहा था: "मुझे अच्छी तरह से याद है। लेमुरिया के डूबने से पहले जब देवताओं ने पवित्र अग्नि का दुरूपयोग होते देख युद्ध छेड़ा था, मैं उस समय के आकाशीय अभिलेखों (akashic records) को आपके सामने प्रस्तुत करता हूँ। यहां 'देवताओं' से मेरा तात्पर्य उन पथभ्रष्ट देवदूतों (fallen angels) से है जिन्होंने अपनी इच्छा से अंधकार और मृत्यु का मार्ग अपनाया था। झूठे पुरोहितवाद (false priesthood) और भगवान की रोशनी, ऊर्जा और चेतना का दुरुपयोग करके तथा दिव्य माँ की जीवित रोशनी को धोखा देकर उन्होंने जो कहर ढाया वो महाद्वीपों के डूबने का कारण बना। आज हम मनुष्य की जो स्थिति देख रहे हैं वह पिछले सतयुगों की स्थिति है।" ''पर्ल्स ऑफ विज्डम'' खंड ३०, न. ६४, पृ. ५४१.देखें।</ref> (Pearls of Wisdom,'' vol. 30, no. 64, p. 541.) आपने लेमूरिया को डूबते हुए देखा था। इसलिए आप अभी भी लेमूरियन हैं; पुराने कर्मों का समाधान करने के लिए दिव्य प्रेम का संकल्प लेने को आप वापिस इस स्थान पर आएं हैं, और वास्तव में इसे घड़ी के ३६० डिग्री पर घटित होना चाहिए....
आप में से कई लोग लेमूरिया के समय में मौजूद थे। आप लेमूरिया का इतिहास और भूगोल जानते हैं। आपने देवताओं का युद्ध भी देखा है।<ref>१८ अक्टूबर १९८७ को एक दिव्य वाणी (dictation) में, एलोहीम पीस (Elohim Peace) ने कहा था: "मुझे अच्छी तरह से याद है। लेमुरिया के डूबने से पहले जब देवताओं ने पवित्र अग्नि का दुरूपयोग होते देख युद्ध छेड़ा था, मैं उस समय के आकाशीय अभिलेखों (akashic records) को आपके सामने प्रस्तुत करता हूँ। यहां 'देवताओं' से मेरा तात्पर्य उन पथभ्रष्ट देवदूतों (fallen angels) से है जिन्होंने अपनी इच्छा से अंधकार और मृत्यु का मार्ग अपनाया था। झूठे पुरोहितवाद (false priesthood) और भगवान की रोशनी, ऊर्जा और चेतना का दुरुपयोग करके तथा दिव्य माँ की जीवित रोशनी को धोखा देकर उन्होंने जो कहर ढाया वो महाद्वीपों के डूबने का कारण बना। आज हम मनुष्य की जो स्थिति देख रहे हैं वह पिछले सतयुगों की स्थिति थी।" ''पर्ल्स ऑफ विज्डम'' खंड ३०, न. ६४, पृ. ५४१.देखें।</ref> (Pearls of Wisdom,'' vol. 30, no. 64, p. 541.) आपने लेमूरिया को डूबते हुए देखा था। इसलिए आप अभी भी लेमूरियन हैं; पुराने कर्मों का समाधान करने के लिए और दिव्य प्रेम का संकल्प लेने को आप वापिस इस स्थान पर आएं हैं, और वास्तव में इसे ब्रह्माण्डीय घड़ी के ३६० डिग्री पर घटित होना चाहिए....


लेमूरिया और पृथ्वी के सभी पुत्र और पुत्रियो, मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि विश्व में आमूलचूल परिवर्तन लाने के लिए आप वायलेट लौ के दिव्य आदेश (decrees) दीजिये। आपके द्वारा दी गई वायलेट लौ के दिव्य आदेश न केवल इस तट को बल्कि पूरे विश्व को संभालने में योगदान देंगी। यदि आप भविष्य देख पाते, तो आप इस कार्य को दिन के कई घंटे करने में भी परहेज़ नहीं करते। क्योंकि तब आप ये जान पाते कि वायलेट लौ ही उन सभी अभिलेखों को साफ़ कर सकती है जो लेमूरिया निवासियों ने बनाये थे - वे उस समय पथभ्रष्ट पुजारियों के साथ मिले हुए थे तथा उन्होंने अच्छे पुजारियों और पुजारिनो की हत्या की थी।
लेमूरिया और पृथ्वी के सभी पुत्र और पुत्रियो, मैं आपसे कहना चाहता हूँ कि विश्व में शीघ्रता से  परिवर्तन लाने के लिए आप वायलेट लौ के दिव्य आदेश (decrees) दीजिये। आपके द्वारा दी गई वायलेट लौ के दिव्य आदेश न केवल इस तट को बल्कि पूरे विश्व को संभालने में योगदान देगें। यदि आप भविष्य देख पाते, तो आप इस कार्य को दिन के कई घंटे करने में भी परहेज़ नहीं करते। क्योंकि तब आप ये जान पाते कि वायलेट लौ ही उन सभी अभिलेखों को साफ़ कर सकती है जो लेमूरिया निवासियों ने बनाये थे - वे उस समय पथभ्रष्ट पुजारियों के साथ मिले हुए थे तथा उन्होंने अच्छे पुजारियों और पुजारिनो की हत्या की थी।


इस समय हम आपको वायलेट लौ के दिव्य आदेशों  द्वारा लेमुरिया पर दिव्य माँ की हत्या के अभिलेखों का रूपांतरण करने के लिए कह रहे हैं।<ref> यह लेमुरिया पर उस युग में दिव्य माँ के सर्वोच्च प्रतिनिधि की हत्या के सन्दर्भ में कहा है। पुराने सतयुगों के दौरान ईश्वर के कई अनुयायियों और भक्तों ने दिव्य माँ की लौ को मूर्त रूप दे एक ऐसी संस्कृति का पोषण किया जो माँ की लौ को नहीं दर्शाता था। दिव्यगुरु लेडी मास्टर देखें [[Special:MyLanguage/Clara Louise|क्लारा लुईस]] (Clara Louise), {{POWref|३४|३०}}</ref> यह रिकॉर्ड एक गहरा रिकॉर्ड है और इसका साफ़ होना बहुत महत्वूर्ण है क्योंकि ऐसा होने पर ही स्त्रियां अपने स्त्रीसुलभ गुणों में पूर्णता प्राप्त कर पाएंगी और आप उन्हें पूरी क्षमता के साथ ईश्वरत्व की ओर आगे बढ़ते हुए देख पाएंगे। लेमुरिया के अभिलेखों के रूपांतरित ना होने से असंख्य जीवात्माएं विभिन्न स्तरों ओर अटकी हुई हैं, जब तक ये अभिलेख रूपांतरित नहीं होते तब तक वे आगे नहीं बढ़ पाएंगी।   
इस समय हम आपको वायलेट लौ के दिव्य आदेशों  द्वारा लेमूरिया पर दिव्य माँ की हत्या के अभिलेखों का रूपांतरण करने के लिए कह रहे हैं।<ref> यह लेमूरिया पर उस युग में दिव्य माँ के सर्वोच्च प्रतिनिधि की हत्या के सन्दर्भ में कहा है। पुराने सतयुगों के दौरान ईश्वर के कई अनुयायियों और भक्तों ने दिव्य माँ की लौ को मूर्त रूप दे एक ऐसी संस्कृति का पोषण किया जो माँ की लौ को नहीं दर्शाता था। दिव्यगुरु लेडी मास्टर देखें [[Special:MyLanguage/Clara Louise|क्लारा लुईस]] (Clara Louise), {{POWref|३४|३०}}</ref> यह रिकॉर्ड एक गहरा रिकॉर्ड है और इसका साफ़ होना बहुत महत्वूर्ण है क्योंकि ऐसा होने पर ही स्त्रियां अपने स्त्रीसुलभ गुणों में पूर्णता प्राप्त कर पाएंगी और आप उन्हें पूरी क्षमता के साथ ईश्वरत्व की ओर आगे बढ़ते हुए देख पाएंगे। लेमूरिया के अभिलेखों के रूपांतरित ना होने से असंख्य जीवात्माएं विभिन्न स्तरों ओर अटकी हुई हैं, जब तक ये अभिलेख रूपांतरित नहीं होते तब तक वे आगे नहीं बढ़ पाएंगी।   


इसलिए हम ये कह सकते हैं कि प्रशांत महासागर का किनारा ही वह स्थान है जहां अत्याधिक मात्रा में वायलेट लौ की आवश्यकता है। यहाँ वायलेट फ्लेम को समुद्र के अंदर बहुत गहराई तक जाना होगा ताकि सभी अभिलेख शुद्ध हो पाएं। प्रियजनों, जब ये अभिलेख रूपांतरित हो जाएंगे तो समाज में एक बहुत बड़ा बदलाव आएगा जिसके फलस्वरूप प्राचीन काल की महान पुजारिनें पुनः सामने आएंगी - वे अवतार लेंगी और स्त्री किरण वाले अन्य लोगों के साथ मिलकर स्त्रीत्व और पुरुषत्व में संतुलन स्थापित करेंगी ताकि पथभ्रष्ट देवदूतों को रास्ते पर लाया जा सके - वे पथभ्रष्ट देवदूत जो सदियों से स्त्री और उसके वंश के खिलाफ कार्य कर रहे थे।<ref>रा म्यू, "ट्रांसम्यूट द रेकॉर्डस ऑफ़ लेमूरिया एंड क्लेम द विक्ट्री ऑफ़ द फेमिनिन रे," {{POWref|४३|१३|, ३१ मार्च, २००२}}</ref>
इसलिए हम ये कह सकते हैं कि प्रशांत महासागर का किनारा ही वह स्थान है जहां अत्याधिक मात्रा में वायलेट लौ की आवश्यकता है। यहाँ वायलेट फ्लेम को समुद्र के अंदर बहुत गहराई तक जाना होगा ताकि सभी अभिलेख शुद्ध हो पाएं। प्रियजनों, जब ये अभिलेख रूपांतरित हो जाएंगे तो समाज में एक बहुत बड़ा बदलाव आएगा जिसके फलस्वरूप प्राचीन काल की महान पुजारिनें पुनः सामने आएंगी - वे अवतार लेंगी और स्त्री किरण वाले अन्य लोगों के साथ मिलकर स्त्रीत्व और पुरुषत्व में संतुलन स्थापित करेंगी ताकि पथभ्रष्ट देवदूतों को रास्ते पर लाया जा सके - वे पथभ्रष्ट देवदूत जो सदियों से स्त्री और उसके वंश के विरुद्ध कार्य कर रहे थे।<ref>रा मू, "ट्रांसम्यूट द रेकॉर्डस ऑफ़ लेमूरिया एंड क्लेम द विक्ट्री ऑफ़ द फेमिनिन रे," {{POWref|४३|१३|, ३१ मार्च, २००२}}</ref>
   [Transmute the Records of Lemuria and Claim the Victory of the Feminine Ray,” {{POWref|43|13|, March 31, 2002}}]
   [<ref>Ra Mu,Transmute the Records of Lemuria and Claim the Victory of the Feminine Ray,” {{POWref|43|13|, March 31, 2002}}]
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== अधिक जानकारी के लिए ==
== अधिक जानकारी के लिए ==


लेमुरिया और उसके पतन पर अधिक जानकारी के लिए, {{CHM}}, पृष्ठ ६०-७८, ४११-१४ देखें।
लेमूरिया और उसके पतन पर अधिक जानकारी के लिए, {{CHM}}, पृष्ठ ६०-७८, ४११-१४ देखें।
(see {{CHM}}, pp. 60–78, 411–14.)


जेम्स चर्चवर्ड की किताब ''द लॉस्ट कॉन्टिनेंट ऑफ म्यू'' (१९३१; पुनर्मुद्रण, न्यूयॉर्क: पेपरबैक लाइब्रेरी संस्करण, १९६८) को भी देखें
जेम्स चर्चवर्ड की किताब ''द लॉस्ट कॉन्टिनेंट ऑफ म्यू'' (१९३१; पुनर्मुद्रण, न्यूयॉर्क: पेपरबैक लाइब्रेरी संस्करण, १९६८) को भी देखें
[See also James Churchward, ''The Lost Continent of Mu'' (1931; reprint, New York: Paperback Library Edition, 1968)]


लेमुरिया के संदर्भ में जानकारी के लिए एच. पी. ब्लावात्स्की की पुस्तक ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'', खंड। I और II, (पासाडेना, सीए: थियोसोफिकल यूनिवर्सिटी प्रेस, १८८८, १९६३), के सूचकांक को देखिये
लेमूरिया के संदर्भ में जानकारी के लिए एच. पी. ब्लावात्स्की की पुस्तक ''द सीक्रेट डॉक्ट्रिन'', खंड। I और II, (पासाडेना, सीए: थियोसोफिकल यूनिवर्सिटी प्रेस, १८८८, १९६३), के सूचकांक को देखिये
[H. P. Blavatsky, ''The Secret Doctrine'', Vols. I and II, (Pasadena, Ca.: Theosophical University Press, 1888, 1963), check index for references to Lemuria.]


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