Translations:Maha Chohan/27/hi: Difference between revisions
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Latest revision as of 07:35, 17 December 2025
कार्मिक सभा ने कहा है कि इस समय पृथ्वी जीवों के विकास में अब वह क्षण आ गया है जब ब्रह्मांड की घड़ी ने संकेत दे दिया है। इस समय समस्त मानव जाति को चाहिए कि वे अपने मनमंदिर को ईश्वर का निवास स्थान बनाने के लिए तैयार करें। बहुत ज़रूरी है कि कम से कम कुछ मनुष्य तो ईश्वर की ऊर्जा को ग्रहण करने के लिए पूर्णतया शुद्ध हों। अगर ऐसा नहीं हुआ तो पृथ्वी का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। क्योंकि जब तक ईश्वर की पवित्र ऊर्जा पुरुषों और स्त्रियों के जीवन में नहीं उतरती पृथ्वी पर जीवन का संतुलन नहीं हो सकता। रात के बारह बजे, जब वर्ष १९७५ प्रारम्भ होगा, ठीक उस समय ईश्वर पृथ्वी पर अपनी ऊर्जा का प्रसारण करेंगे। महा चौहान,"शताब्दी के अंतिम तिमाही में ईश्वरीय ऊर्जा के लिए गवाही का एक तंबू" ([1]
- ↑ The Maha Chohan,“A Tabernacle of Witness for the Holy Spirit in the Final Quarter of the Century,” July 1, 1974.)