Mass consciousness/hi: Difference between revisions

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प्रियजनो, सामूहिक जन चेतना दुनिया के रंग ढंग के अनुसार होती है। ग्रह मंडलों का परिणाम सबसे ऊपर और सबसे निम्न स्तर के कुछ लोगों पर ही निर्भर करता है। महत्वपूर्ण बात ये है कि क्या ऊपर के स्तर पर स्थित लोग अपने उस विशिष्ट स्थान को पहचानते हैं? क्या वे ये समझते हैं कि वे वास्तव में ऊपर के स्तर पर हैं और पृथ्वी पर रहने वाले लाखों लोगों को प्रकाश देने का उत्तरदायित्व उन पर है? क्या वे मानते हैं कि पथभ्रष्ट (जिनकी चेतना पाताल लोक के कीचड़ में  फँसी है) लोगों को रास्ते पर लाने में उनकी भूमिका सर्वोपरि है?
प्रियजनो, सामूहिक जन चेतना दुनिया के रंग ढंग के अनुसार होती है। ग्रह मंडलों का परिणाम सबसे ऊपर और सबसे निम्न स्तर के कुछ लोगों पर ही निर्भर करता है। महत्वपूर्ण बात ये है कि क्या ऊपर के स्तर पर स्थित लोग अपने उस विशिष्ट स्थान को पहचानते हैं? क्या वे ये समझते हैं कि वे वास्तव में ऊपर के स्तर पर हैं और पृथ्वी पर रहने वाले लाखों लोगों को प्रकाश देने का उत्तरदायित्व उन पर है? क्या वे मानते हैं कि पथभ्रष्ट (जिनकी चेतना पाताल लोक के कीचड़ में  फँसी है) लोगों को रास्ते पर लाने में उनकी भूमिका सर्वोपरि है?


इसलिए हम ये कह सकते हैं कि पृथ्वी की नियति को कुछ लोगों के हाथों में है। यह दो प्रकार के लोगों के निर्णयों के संतुलन पर निर्भर है - एक वो जो प्रकाश की विस्तृत श्रेणी में रहते हैं तथा दूसरे वो जो अन्धकार में रहते हैं।<ref>कुज़्को, “द विज़डम ऑफ गॉड पेरेंट्स,” {{POWref|३२||, ८ जनवरी, १९८९}}</ref>
इसलिए हम ये कह सकते हैं कि पृथ्वी की नियति (destiny) को कुछ लोगों के हाथों में है। यह दो प्रकार के लोगों के निर्णयों के संतुलन पर निर्भर है - एक वो जो प्रकाश की विस्तृत श्रेणी में रहते हैं तथा दूसरे वो जो अन्धकार में रहते हैं।<ref>Cuzco, “The Wisdom of God Parents,” {{POWref|32|2|, January 8, 1989}}</ref>
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[[Special:MyLanguage/Human consciousness|मानवी चेतना]] (Human consciousness)
[[Special:MyLanguage/Human consciousness|मानवी चेतना]] (Human consciousness)


[[Special:MyLanguage/Christ consciousness|आत्मिक चेतना]]
[[Special:MyLanguage/Christ consciousness|आत्मिक चेतना]] (Christ consciousness)


[[Special:MyLanguage/Cosmic consciousness|ब्रह्मांडीय चेतना]] (Cosmic consciousness)
[[Special:MyLanguage/Cosmic consciousness|ब्रह्मांडीय चेतना]] (Cosmic consciousness)


[[Special:MyLanguage/God consciousness|ईश्वरीय चेतना]]
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Latest revision as of 10:33, 18 December 2025

सामूहिक चेतना; मानवता की सामूहिक अचेतन; मानव जाति की सामूहिक जागरूकता का निम्नतम स्तर जो सूक्ष्म जगत के स्तर पर स्पंदित होता है। सामूहिक चेतना मानवता की सामूहिक (collective), कम्प्यूटरीकृत (computerized), प्रोग्राम (programmed) की गई चेतना है।

कुज़्को (Cuzco) ग्रह के आध्यात्मिक विकास के लिए जन मानस की सामूहिक चेतना के बारे में कहते हैं:

पृथ्वी पर जन मानस की सामूहिक चेतना हमेशा एक सामान्य स्तर पर रहती है। लेकिन अगर यह सामूहिक चेतना पवित्र आत्मा के सभी गुणों से परिपूर्ण किसी उच्च चेतना वाले सिद्ध पुरुष की ओर केंद्रित की जाती है, तो यह पृथ्वी पर मौजूद सभी लोगों में दिव्य चमक को पुनः जागृत कर सकती है।

लेकिन प्रियजनों, जो लोग अपरिभाषित क्षेत्र (gray area) में हैं वे केवल तब प्रतिक्रिया में आते हैं जब कोई उनको बाहर से उकसाता है, ऐसे लोग उच्च चेतना वाले लोगों के प्रति उदासीन होते हैं और इसलिए वे धीरे धीरे नीचे गिरते जाते हैं...

प्रियजनो, सामूहिक जन चेतना दुनिया के रंग ढंग के अनुसार होती है। ग्रह मंडलों का परिणाम सबसे ऊपर और सबसे निम्न स्तर के कुछ लोगों पर ही निर्भर करता है। महत्वपूर्ण बात ये है कि क्या ऊपर के स्तर पर स्थित लोग अपने उस विशिष्ट स्थान को पहचानते हैं? क्या वे ये समझते हैं कि वे वास्तव में ऊपर के स्तर पर हैं और पृथ्वी पर रहने वाले लाखों लोगों को प्रकाश देने का उत्तरदायित्व उन पर है? क्या वे मानते हैं कि पथभ्रष्ट (जिनकी चेतना पाताल लोक के कीचड़ में फँसी है) लोगों को रास्ते पर लाने में उनकी भूमिका सर्वोपरि है?

इसलिए हम ये कह सकते हैं कि पृथ्वी की नियति (destiny) को कुछ लोगों के हाथों में है। यह दो प्रकार के लोगों के निर्णयों के संतुलन पर निर्भर है - एक वो जो प्रकाश की विस्तृत श्रेणी में रहते हैं तथा दूसरे वो जो अन्धकार में रहते हैं।[1]

इसे भी देखिये

मानवी चेतना (Human consciousness)

आत्मिक चेतना (Christ consciousness)

ब्रह्मांडीय चेतना (Cosmic consciousness)

ईश्वरीय चेतना (God consciousness)

स्रोत

Mark L. Prophet and Elizabeth Clare Prophet, Saint Germain On Alchemy: Formulas for Self-Transformation

  1. Cuzco, “The Wisdom of God Parents,” Pearls of Wisdom, vol. 32, no. 2, January 8, 1989.