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ईसा मसीह ने कर्म और उसके फल के बारे में दृढ़तापूर्वक कहा है। कर्म के सिद्धांत को समझाने के लिए उन्होंने अपने जीवन से भी कई दृष्टान्त दिए हैं। उन्होंने बुरे कर्म करने वालों को कई चेतावनियां भी दी हैं। उन्होंने कई बार कहा है की अंत में हमारे सभी कर्मों का हिसाब अवश्य होता है। उन्होंने यह भी बताया है कि प्रत्येक व्यक्ति की एक [[Special:MyLanguage/book of life|बुक ऑफ लाइफ]] (book of life) होती है जिसमे उसके सभी कर्म लिखे जाते हैं। मैथ्यू १२:३५-३७ में ईसा मसीह ने फारीसी लोगों और लेखकों को कर्म का सिद्धांत समझाया है। | ईसा मसीह ने कर्म और उसके फल के बारे में दृढ़तापूर्वक कहा है। कर्म के सिद्धांत को समझाने के लिए उन्होंने अपने जीवन से भी कई दृष्टान्त दिए हैं। उन्होंने बुरे कर्म करने वालों को कई चेतावनियां भी दी हैं। उन्होंने कई बार कहा है की अंत में हमारे सभी कर्मों का हिसाब अवश्य होता है। उन्होंने यह भी बताया है कि प्रत्येक व्यक्ति की एक [[Special:MyLanguage/book of life|बुक ऑफ लाइफ]] (book of life) होती है जिसमे उसके सभी कर्म लिखे जाते हैं। मैथ्यू १२:३५-३७ (Matthew 12:35–37) में ईसा मसीह ने फारीसी लोगों और लेखकों को कर्म का सिद्धांत समझाया है। | ||
Latest revision as of 10:19, 14 February 2025
ईसा मसीह ने कर्म और उसके फल के बारे में दृढ़तापूर्वक कहा है। कर्म के सिद्धांत को समझाने के लिए उन्होंने अपने जीवन से भी कई दृष्टान्त दिए हैं। उन्होंने बुरे कर्म करने वालों को कई चेतावनियां भी दी हैं। उन्होंने कई बार कहा है की अंत में हमारे सभी कर्मों का हिसाब अवश्य होता है। उन्होंने यह भी बताया है कि प्रत्येक व्यक्ति की एक बुक ऑफ लाइफ (book of life) होती है जिसमे उसके सभी कर्म लिखे जाते हैं। मैथ्यू १२:३५-३७ (Matthew 12:35–37) में ईसा मसीह ने फारीसी लोगों और लेखकों को कर्म का सिद्धांत समझाया है।