1,857
edits
No edit summary |
No edit summary |
||
| Line 3: | Line 3: | ||
जेडकीयल और अमेथिस्ट सातवीं लौ के [[Special:MyLanguage/archangel|महादेवदूत]] और उनकी दिव्य सहायिका हैं जो हमें [[Special:MyLanguage/alchemy|रसायन विद्या]],[[Special:MyLanguage/transmutation|रूपांतरण क्रिया]],माफ़ करने की क्षमता और न्याय करने का साहस इन सभी गुणों द्वारा हमें भगवान् से जोड़ते हैं। ये वही गुण हैं जो [[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जर्मैन]] और उनकी [[Special:MyLanguage/twin flame|समरुप जोड़ी]],[[Special:MyLanguage/Portia|पोरशिया]] हमें सिखाते हैं। ये हमें [[Special:MyLanguage/seat-of-the-soul chakra|स्वाधिष्ठान चक्र]] के बारे में | जेडकीयल और अमेथिस्ट सातवीं लौ के [[Special:MyLanguage/archangel|महादेवदूत]] और उनकी दिव्य सहायिका हैं जो हमें [[Special:MyLanguage/alchemy|रसायन विद्या]],[[Special:MyLanguage/transmutation|रूपांतरण क्रिया]],माफ़ करने की क्षमता और न्याय करने का साहस इन सभी गुणों द्वारा हमें भगवान् से जोड़ते हैं। ये वही गुण हैं जो [[Special:MyLanguage/Saint Germain|संत जर्मैन]] और उनकी [[Special:MyLanguage/twin flame|समरुप जोड़ी]],[[Special:MyLanguage/Portia|पोरशिया]] हमें सिखाते हैं। ये हमें [[Special:MyLanguage/seat-of-the-soul chakra|स्वाधिष्ठान चक्र]] के बारे में | ||
बताते हैं जिसका रंग वायलेट है। सातवीं लौ का दिन शनिवार है, जब हम इस दिन जेडकीयल और अमेथिस्ट की अर्चना करते हैं तो हमें इनके कारण शरीर से अत्यधिक मात्रा मैं वायलेट उर्जा और ब्रह्माण्ड की चेतना प्राप्त होती है। | |||
अपने आश्रयस्थल में महादेवदूत जेडकियल सभी मनुष्यों को ईश्वरीय गुणों में शिक्षित करते हैं ताकि वे [[Special:MyLanguage/Melchizedek|आर्डर ऑफ़ मेलचेजड़ेक]] के अंतर्गत ईश्वर के पुजारी और पुजारिन बन पाएं। जिन दिनों [[Special:MyLanguage/Atlantis|एटलांटिस महाद्वीप]] इस संसार में विद्यमान था, संत जर्मैन और [[Special:MyLanguage/Jesus|जीसस क्राइस्ट]] दोनो ने ही महादेवदूत जेडकियल के आश्रयस्थल में शिक्षा प्राप्त की थी। जेडकियल ने ही इन दोनों को पुजारी के रूप में दीक्षित किया था। | अपने आश्रयस्थल में महादेवदूत जेडकियल सभी मनुष्यों को ईश्वरीय गुणों में शिक्षित करते हैं ताकि वे [[Special:MyLanguage/Melchizedek|आर्डर ऑफ़ मेलचेजड़ेक]] के अंतर्गत ईश्वर के पुजारी और पुजारिन बन पाएं। जिन दिनों [[Special:MyLanguage/Atlantis|एटलांटिस महाद्वीप]] इस संसार में विद्यमान था, संत जर्मैन और [[Special:MyLanguage/Jesus|जीसस क्राइस्ट]] दोनो ने ही महादेवदूत जेडकियल के आश्रयस्थल में शिक्षा प्राप्त की थी। जेडकियल ने ही इन दोनों को पुजारी के रूप में दीक्षित किया था। | ||
edits