Jump to content

Kuan Yin/hi: Difference between revisions

no edit summary
No edit summary
No edit summary
Tags: Mobile edit Mobile web edit
Line 18: Line 18:
सदियों से कुआन यिन ने [[Special:MyLanguage/bodhisattva|बोधिसत्व]] (bodhisattva) की अपनी भूमिका में महायान बौद्ध (Mahayana Buddhism) धर्म के महान आदर्शों को चित्रित किया है। बोधिसत्व यानि कि "आत्मज्ञान से भरपूर प्राणी", जिसे [[Special:MyLanguage/Buddha|बुद्ध]] बनना था पर जिसने भगवान के बच्चों के लिए अपने [[Special:MyLanguage/nirvana|निर्वाण]] (nirvana) का त्याग कर दिया। कुआन यिन ने पृथ्वी एवं उसके सौर मंडल के जीवों के उत्थान हेतु, उन्हें दिव्यगुरूओं द्वारा दिया गया ज्ञान देने के लिए बोधिसत्व होने का प्रण लिया है।
सदियों से कुआन यिन ने [[Special:MyLanguage/bodhisattva|बोधिसत्व]] (bodhisattva) की अपनी भूमिका में महायान बौद्ध (Mahayana Buddhism) धर्म के महान आदर्शों को चित्रित किया है। बोधिसत्व यानि कि "आत्मज्ञान से भरपूर प्राणी", जिसे [[Special:MyLanguage/Buddha|बुद्ध]] बनना था पर जिसने भगवान के बच्चों के लिए अपने [[Special:MyLanguage/nirvana|निर्वाण]] (nirvana) का त्याग कर दिया। कुआन यिन ने पृथ्वी एवं उसके सौर मंडल के जीवों के उत्थान हेतु, उन्हें दिव्यगुरूओं द्वारा दिया गया ज्ञान देने के लिए बोधिसत्व होने का प्रण लिया है।


बौद्ध धर्म के प्रारम्भ से पहले चीन में कुआन यिन की पूजा की जाती थी - इन्हें [[Special:MyLanguage/Avalokitesvara|अवलोकितेश्वर]] (Avalokitesvara) [पद्मपानी (Padmapani)] का अवतार माना जाता था। ''[[Special:MyLanguage/Om mani padme hum|ओम मणि पद्मे हुम्]]'' (Om mani padme hum) मंत्र के द्वारा उनका आह्वान किया जाता है। इस मंत्र का अर्थ है "कमल में स्थित रत्न की विजय हो!" या “अवलोकितेश्वर, जो भक्त के हृदय कमल के आभूषण हैं, की विजय हो।
बौद्ध धर्म के प्रारम्भ से पहले चीन में कुआन यिन की पूजा की जाती थी - इन्हें [[Special:MyLanguage/Avalokitesvara|अवलोकितेश्वर]] (Avalokitesvara) [पद्मपानी (Padmapani)] का अवतार माना जाता था। ''[[Special:MyLanguage/Om mani padme hum|ओम मणि पद्मे हुम्]]'' (Om mani padme hum) मंत्र के द्वारा उनका आह्वान किया जाता है। इस मंत्र का अर्थ है "कमल में स्थित रत्न की विजय हो!" या “अवलोकितेश्वर, जो भक्त के हृदय में कमल रुपी आभूषण हैं, की विजय हो।


ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब प्रकाश के बुद्ध [[Special:MyLanguage/Amitabha|अमिताभ]] (Amitabha) ईश्वर में मग्न हो परमानंद की अनुभूति कर रहे थे तब उनके दाहिने नेत्र से श्वेत रौशनी की एक किरण उत्पन्न हुई, इसी किरण से अवलोकितेश्वर का जन्म हुआ। इसी कारण से अवलोकितेश्वर/ कुआन यिन को अमिताभ का "प्रतिबिंब" माना जाता है। ये ''महा करुणा'' की प्रतिमा हैं, अमिताभ भी महा करुणा का मूर्तरूप हैं। अनुयायियों का ऐसा मानना ​​है कि कुआन यिन अमिताभ की करुणा को अधिक प्रत्यक्ष और व्यक्तिगत तरीके से व्यक्त करती है और भक्तों की प्रार्थनाओं का उत्तर जल्दी देती हैं।
ऐसा कहा जाता है कि एक बार जब प्रकाश के बुद्ध [[Special:MyLanguage/Amitabha|अमिताभ]] (Amitabha) ईश्वर में मग्न हो परमानंद की अनुभूति कर रहे थे तब उनके दाहिने नेत्र से श्वेत रौशनी की एक किरण उत्पन्न हुई, इसी किरण से अवलोकितेश्वर का जन्म हुआ। इसी कारण से अवलोकितेश्वर/ कुआन यिन को अमिताभ का "प्रतिबिंब" माना जाता है। ये ''महा करुणा'' की प्रतिमा हैं, अमिताभ भी महा करुणा का मूर्तरूप हैं। अनुयायियों का ऐसा मानना ​​है कि कुआन यिन अमिताभ की करुणा को अधिक प्रत्यक्ष और व्यक्तिगत तरीके से व्यक्त करती है और भक्तों की प्रार्थनाओं का उत्तर जल्दी देती हैं।
8,990

edits